SDM Full Form In Hindi

SDM Full Form In Hindi: भारत एक विशाल देश है जिसमें हर पद पर एक न एक व्यक्ति विराजमान है। चाहे वह छोटे से क्लर्क से लेकर बड़े प्रधानमंत्री तक हो हर कोई भारत देश की सेवा में लगा हुआ है। ऐसे में हम लोगों की सुरक्षा इनकी जिम्मेदारी हो जाती है। आज के बढ़ते दौर में एक बहुत ही प्रचलित नाम सामने आता है न्यायाधीश का। न्यायाधीश एक ऐसी व्यक्तित्व है जो सही वह गलत का फैसला सुनाता है। उनके द्वारा दिया गया सजा और दी गई आजादी को हर किसी को मानना पड़ता है। चाहे फिर हो कोई छोटा मोटा आदमी हो या बड़े से बड़ा हर कोई न्यायाधीश के आगे एक सामान्य व्यक्ति है।

SDM Full Form In Hindi

1.SDM Full form in Hindi: उप प्रभागीय न्यायाधीश

2.SDM Full form in English: Sub district magistrate

SDM Kiya Hai

sdm एक पद है जिस पर नियुक्त व्यक्ति को उप न्यायाधीश भी कहा जाता है। यह बिल्कुल न्यायाधीश की व्यक्तिगतआचरण रखते हैं। न्यायधिश के द्वारा दी गई हर फैसले का आदर और सम्मान करना हर किसी का धर्म समान होता है। यदि कोई उनकी बातों का उल्लंघन करता है तो उसे इसके लिए सजा का भुगतान करना पड़ सकता है।

एसडीएम कुछ ऐसी ही व्यक्तिगत प्रक्रिया है जिसके अंदर एक ऐसे व्यक्ति का चयन किया जाता है जो छोटे-मोटे निजी मामलों पर अपना फैसला सुना सके। उनके द्वारा सुनाए गए फैसले को हर किसी को मानना होता है फिर चाहे वह गलत रहे या ना रहे। परंतु इसका मतलब यह नहीं कि वह केवल गलत ही फैसला सुनाते हैं।

Sdm का full form

एसडीएम का फुल फॉर्म होता है सब डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ( sub destrict megistrate) हिंदी में इसका अर्थ होता है उप प्रभागीय न्यायाधीश। इनके द्वारा बहुत सारे छोटे मोटे फैसले लिए जाते हैं जैसे कि जो कुछ भी व्यक्तिगत और छोटे-मोटे मामले होते हैं वह सब इनके द्वारा सुझाए जाते हैं। इनके द्वारा बहुत सारे सरकारी कार्य किए जाते हैं जैसे कि भूमि संबंधित बाधाएं, विवाह का रजिस्ट्रेशन करवाना, किसी प्रकार की पंजीकरण या लाइसेंस जारी करना, यहां तक कि इनका कार्य लोकसभा विधानसभा में कैंडिडेट का चुनाव करवाना भी होता है।

Conclusion

एसडीएम एक ऐसी जनता सेवा है जो सरकार द्वारा पद पर नियुक्त की जाती है। सब डिस्ट्रिक्ट मेजिस्ट्रेट का कार्य केवल सही फैसले सुनाना है यदि उनसे कोई गलती हो जाए तो उनका सुधार करना भी उनकी ही जिम्मेदारी है। बढ़ते समय के साथ हर कोई घूस लेने लगा है परंतु एक न्यायाधीश को सही न्याय और अन्याय के बीच में फर्क समझ आना चाहिए। किसी का भी नुकसान ना हो यह सोच कर ही अपना फैसला और अपनी बातें रखनी चाहिए।

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